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बुधवार और एकादशी का योग, दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और लक्ष्मी-विष्णु का अभिषेक करें, गणेशजी के साथ रिद्धि-सिद्धि की पूजा करें

1 जुलाई को बुधवार और एकादशी का योग है। ये आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारस है। इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस तिथि से भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस तिथि पर विष्णु-लक्ष्मी के साथ ही गणेश और रिद्धि-सिद्धि की भी पूजा जरूर करनी चाहिए।

सालभार की सभी एकादशियों का महत्व स्कंद पुराण के वैष्णव खंड के एकादशी महात्म्य अध्याय में बताया गया है। एकादशी पर व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत किया जाता है और पूजा के बाद जरूरतमंद लोगों को दान दिया जाता है।

विष्णु-लक्ष्मी का अभिषेक करें

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और अभिषेक करें। पूजन में फल-फूल, गंगाजल, धूप दीप और प्रसाद आदि अर्पित करें। व्रत करने वाले व्यक्ति को इस दिन एक समय फलाहार करना चाहिए। रात में भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाएं। केले और हलवे का भोग लगाएं। पीले वस्त्र चढ़ाएं। भगवान के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें। अगले दिन यानी द्वादशी पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को धन, अनाज, छाता और वस्त्रों का दान करें।

एकादशी पर गणेशजी के साथ रिद्धि-सिद्धि की पूजा भी करें

गणेशजी के साथ ही रिद्धि-सिद्धि की भी पूजा करें। इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। गणेशजी को दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाएं और श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें।



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