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कहानी:पतिदेव और मिश्राजी में ताज़ा अख़बार पाने की होड़ लगी थी, जिस रेस में मुझे दौड़ना पड़ रहा था लेकिन पड़ोसी धर्म निभाना भी तो ज़रूरी था

रोज़ सुबह अख़बार पढ़ा हुआ मिलता था। कोई अख़बार से भला क्या चुरा सकता था, लेकिन ताज़गी चली जाती थी। तफ़्तीश से जो पाया वो गर्व करने का मौका तो दे गया लेकिन तक़लीफ बरकरार रही।

February 27, 2021 at 05:00AM
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