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बोधकथा:जो पास है, उसे देकर एक क्षण भी अतिरिक्त नहीं पा सकोगे, तो दर्प कैसा और किस चीज़ का?

जो हासिल है, उसका शुक्र मनाओ। घमंड करने का कोई लाभ नहीं। समय ख़त्म हुआ, तो ख़त्म ही समझो।

February 27, 2021 at 05:00AM
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